| Book Details | |
| Book Author | Dr. Longjam Romi Devi |
| Language | Hindi |
| Book Editions | First |
| Binding Type | Hardcover |
| Pages | 264 |
| Publishing Year | 2025 |
यह पुस्तक स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी आलोचना के विविध आयामों को समग्रता में उजागर करती है। हिंदी कहानी के विविध आंदोलनों और उनकी प्रवृत्तियों पर इस कृति में गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है। स्वतंत्रता के पश्चात् की हिंदी कहानी के शीर्ष कहानीकारों और उनकी कहानियों पर सूक्ष्म विश्लेषण इस कृति की उपादेयता में वृद्धि करता है। स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी आलोचना के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों का सारगर्भित विवेचन यहाँ प्रस्तुत किया गया है। विभिन्न आलोचकों की आलोचना-दृष्टि को इस पुस्तक में सहज और संप्रेषणीय भाषा में प्रकाशित किया गया है। वर्तमान हिदी कहानी के स्वरूप एवं वैशिष्ट्य पर केंद्रित अनुशीलन मौलिकतापूर्ण है। प्रस्तुत पुस्तक में स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी आलोचना से संबंधित विविध पक्षों के तात्त्विक अनुशीलन और उनकी मौलिकतापूर्ण अभिव्यक्ति का उपक्रम लक्षित किया जा सकता है। पुस्तक की महत्ता और उपादेयता इस दृष्टि से असंदिग्ध है कि यहाँ नई कहानी आंदोलन से लेकर इक्कीसवीं सदी की हिंदी कहानी के स्वरूपगत वैशिष्ट्य और उन पर लिखी हुई आलोचना का विश्लेषण किया गया है।