| Book Details | |
| Book Author | Dr. Vivek Dwivedi |
| Language | Hindi |
| Book Editions | First |
| Pages | 192 |
| Publishing Year | 2025 |
उपन्यास विविध विषयों पर लिखे गये हैं और आज भी लिखे जा रहे हैं। श्री द्विवेदी जी का यह उपन्यास 'अंतरीप' एक प्रेम कथा है। पंजाब में प्रेम कथाओं का जन्म हुआ था। जिसमें वारिस शाह रचित हीर को साहित्य जगत में भलीभाँति लोग जानते हैं। अमीर जाति की खूबसूरत हीर ने रांझा से प्यार किया। अपने चार भाइयों में सबसे छोटा रांझा परिवार से बिद्रोह करके हीर के गाँव तक जा पहुँचा था। शाहजहाँ और मुमताज की कहानी जगत प्रसिद्ध हुई। उसे प्रेम प्रतीक के रूप में ताजमहल को देखा जा सकता है। इसी तरह रोमियो जुलियट की प्रेम कहानी को कौन नही जानता। किन्तु इसे दुःखद प्रेम कहानी की श्रेणी में माना जाता है। दोनों के बीच इस प्रेम कहानी को चार शताब्दी से पाठक लगातार पढ़ता आ रहा है। दुनिया के इतिहास में आदर्श प्रेम कहानी के रूप में पहचानी जाती है। राम सीता के प्रेम की प्रशंसा करते हुए राम भक्त हनुमान जी ने लंका में कहा था। 'दुष्करं कृतवान रामो हीनो यदनया प्रभुः धारयत्यात्मनो देहं न शोकेनावसीदति।' इसी तरह राधा और श्री कृष्ण की प्रेमगाथा जगत प्रसिद्ध है। हम सब जानते हैं कि इतिहास के पन्ने में दर्ज पृथ्वीराज और संयुक्ता की कहानी। दोनों ने एक दूसरे को देखा ही नहीं था। कहाँ कन्नौज और कहां दिल्ली। लेकिन दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे थे। अंतरीप उपन्यास के सहनायक आनंद और नायिका रागिनी की कहानी इससे कम नहीं है। दोनों के बीच अमीरी और गरीब की खाई कभी रोड़ा नहीं बन पायी।